जन आशीर्वाद यात्रा में CM शिवराज की गाड़ी पर पथराव, दिखाए काले झंडे

मध्य प्रदेश के चुरहट में रविवार देर शाम मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान सीएम के रथ पर अज्ञात लोगों ने पत्थर फेंक दिया. हालांकि पत्थर फेंकने की घटना में किसी को भी चोट तो नहीं लगी, लेकिन सीएम के रथ के शीशे जरूर चटक गए. पत्थर किसने फेंका इसकी पुष्टि नहीं हुई लेकिन घटना के बाद बीजेपी ने इसके लिए कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराया है.
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हए ट्वीट किया और लिखा, 'चुरहट विधानसभा क्षेत्र में शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा के रथ पर किया गया पथराव कायराना हरकत है. सभ्य समाज में ऐसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. जनता इस कायरता का करारा जवाब कांग्रेस को देगी'.
वहीं मध्यप्रदेश बीजेपी के मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पराशर ने ट्वीट करते हुए कहा कि चुरहट में जन आशीर्वाद यात्रा को मिले अपार जनसमर्थन से लोग कायरों की तरह पथराव पर उतर आए. पूरे प्रदेश की जनता और ईश्वर मुख्यमंत्री के साथ हैं. कायराना हरकत करने वालों, जनता तुम्हारी कायरता का करारा जवाब देगी.काले झंडे भी दिखाए गए
सीधी जिले के मायापुर में जब शिवराज सिंह चौहान की जन आशीर्वाद यात्रा पहुंची तो विरोध स्वरूप लोगों ने सीएम शिवराज को काले झंडे दिखाए. अब ये पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि काले झंडे दिखाने वाले किसी राजनैतिक संगठन से थे या एससी- एसटी एक्ट एक्ट का विरोध करने वाले संगठनों से जुड़े हुए लोग थे क्योंकि रविवार को पूरे प्रदेश में नेताओं को एससी- एसटी एक्ट पर विरोध का सामना करना पड़ा है.
गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले पाटीदार आंदोलन को हवा देने वाले हार्दिक पटेल पिछले करीब 10 दिन से अनशन पर बैठे हैं. हार्दिक पटेल ने अपनी अनिश्चिकालीन भूख हड़ताल के नौवें दिन रविवार को अपनी वसीयत जारी की.
आरक्षण और किसानों की ऋण माफी की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हार्दिक ने अपनी वसीयत में अपनी सारी संपत्ति का वारिस अपने माता-पिता को बताया है. इसके अलावा उनकी वसीयत में क्या है, पढ़ें...
# वसीयत में माता-पिता को बताया वारिस
# एक कार के मालिक हैं, एक इंश्योरेंस पॉलिसी भी हार्दिक के नाम
# हार्दिक पर लिखी जा रही किताब 'Who Took My Job' की 15 फीसदी रॉयल्टी माता-पिता को, 15 फीसदी बहन को और बाकी की सारी रॉयल्टी आरक्षण आंदोलन में मारे गए युवाओं के परिवार को.
# मौत के बाद नेत्रदान की इच्छा
# अभी 50,000 कैश उनके पास, जिसमें से 20 हजार मां-बाप और 30 हजार गोशाला को दिया जाएगा.
तृणमूल कांग्रेस, राकांपा और राजद समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और प्रतिनिधियों ने पिछले नौ दिनों में पटेल से मुलाकात की है. हालांकि भाजपा सरकार ने अभी तक हस्तक्षेप नहीं किया है.
बता दें कि हार्दिक अपने घर पर अनशन पर इसलिए बैठे हैं क्योंकि उन्हें स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार से अहमदाबाद में अनशन की इजाजत नहीं मिली है.
केंद्र सरकार की ओर से अभी हाल में पारित संशोधित दलित कानून (एससी-एसटी एक्ट) के विरोध में देश के कई राज्यों में आवाज उठने लगी है. सोमवार को मध्य प्रदेश में सवर्णों का हुजूम सड़कों पर उतरा और अपना विरोध दर्ज कराया. यूपी के कई हिस्सों में भी विरोध की खबरें हैं. कुछ दिन पहले बिहार के कई जिलों में सवर्णों ने खुलेआम विरोध प्रदर्शन कर नाराजगी जाहिर की थी.
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. उसके पहले सवर्णों का विरोध काफी अहम माना जा रहा है. यहां अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा और क्षत्रिय महासभा ने बीजेपी के खिलाफ खुलकर विरोध शुरू कर दिया है. चूंकि केंद्र और मध्य प्रदेश दोनों जगह बीजेपी की सरकार है, इसलिए इस कानून का ठीकरा इस पार्टी पर फोड़ते हुए महासभा ने बीजेपी को हराने का संकल्प तक ले लिया है.
उधर, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमर सिंह भदौरिया ने कहा कि अगले विधानसभा चुनाव में संगठन बीजेपी का खुलकर विरोध करेगा और लोगों से इसके खिलाफ वोट देने की अपील करेगा. भदौरिया ने कानून में केंद्र सरकार की ओर से लाए गए बदलाव को गलत ठहराते हुए कहा कि इससे सामान्य वर्ग के हितों को गहरी चोट पहुंची है.
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा की भी कुछ ऐसी ही शिकायत है. महासभा ने एलान किया है कि वह चुनाव आते-आते हर जिले में बीजेपी उम्मीदवारों का विरोध करेगी. महासभा की योजना अलग-अलग राज्यों में विधानसभा घेराव की भी है.
यूपी में भी विरोध
यूपी के फिरोजाबाद में रविवार को सवर्णों ने इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया. भारतीय सवर्ण महासभा ने कोटला रोड बंबा चौराहे पर केंद्र सरकार का पुतला फूंका. यहां भारतीय सवर्ण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष संजीव उपाध्याय ने कहा कि 22 फीसदी लोगों को खुश करने के लिए केंद्र सरकार ने 78 फीसदी लोगों के साथ अन्याय किया है. इस कानून का दुरुपयोग कर लोगों का उत्पीड़न होगा. बिना किसी जांच के सवर्णों का जेल जाने का खतरा बढ़ जाएगा.
बिहार में हो चुका है प्रदर्शन
अभी हाल में बिहार में इस कानून के खिलाफ सवर्ण सड़कों पर उतरे थे. गया, बेगूसराय, नालंदा और बाढ़ जिलों में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. गया में सड़कों पर जाम हटाने गई पुलिस पर उग्र लोगों ने हमला कर दिया. कहीं-कही से पथराव की भी खबर थी. सवर्ण सड़कों पर उतर कर दलित कानून के विरोध में सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते दिखे.
गया में इस कानून के विरोध में सवर्णों ने मानपुर में बाजार-हाट बंद करा दिए. यहां सड़क जाम कर रहे लोगों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की और कहीं-कहीं लाठीचार्ज की भी खबर थी. बेगूसराय में लोगों ने नगर थाना के काली स्थान चौक, हेमरा चौक और मुफसिल थाना क्षेत्र के मोहनपुर-राजौरा सड़क को जाम कर दिया. गुस्साए लोग टायर जलाकर प्रदर्शन करते दिखे. लखीसराय में भी आरक्षण और दलित कानून के विरोध में लोगों में नाराजगी दिखी.

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